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मसीह ही जीवन और जोयती

उस में जीवन था और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी।
[युहन्ना 1:4]

जीवन हम सबको अमूल्य है, और इस जीवन को सफल और उत्तम बनाने के लिया हमारे पास कई प्लान है। हम इस तेज़ भाग दौड़ जिंदगी में इतने व्यस्त हें की हम यह भूल जाते है की  हमारे यह जीवन हमें हमारे परमेश्वर ने दीया है। वोह ही हमारे इस जीवन का रचेता और पालनकर्ता है, और उसके बिना हमारे इस शारीर में जीवन न होगा। इस ब्लॉग के संदार्ब में  बताये  हुआ पढ़ में युहन्ना ने परमेश्वर को जीवन और वह जीवन सभी के लिए ज्योति  का प्रमाण था। अगर हम इस पढ़ को समज पाए तो हम जीवन का मतलब समज सकते है।

युहन्ना 2

1 फिर तीसरे दिन गलील के काना में किसी का ब्याह था, और यीशु की माता भी वहां थी।
2 और यीशु और उसके चेले भी उस ब्याह में नेवते गए थे।
3 जब दाखरस घट गया, तो यीशु की माता ने उस से कहा, कि उन के पास दाखरस नहीं रहा।
4 यीशु ने उस से कहा, हे महिला मुझे तुझ से क्या काम? अभी मेरा समय नहीं आया।
5 उस की माता ने सेवकों से कहा, जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना।
6 वहां यहूदियों के शुद्ध करने की रीति के अनुसार पत्थर के छ: मटके धरे थे, जिन में दो दो, तीन तीन मन समाता था।
7 यीशु ने उन से कहा, मटकों में पानी भर दो: सो उन्हों ने मुँहामुँह भर दिया।
9 वे ले गए, जब भोज के प्रधान ने वह पानी चखा, जो दाखरस बन गया था, और नहीं जानता था, कि वह कहां से आया हे, ( परन्तु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे) तो भोज के प्रधान ने दूल्हे को बुलाकर, उस से कहा।

युहन्ना 1

1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।
2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था।
3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।
4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।
5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।
6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था।
7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।